मुंबई : कपास, प्याज, सोयाबीन, अंगूर और अनार की खेती के लिए फेमस महाराष्ट्र में इस समय गेहूं की खरीद भी हो रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस समय प्रदेश में गेहूं की अच्छी आवक है. करीब 19 से 20 हजार क्विंटल गेहूं मंडियों में आया है. प्रदेश की विभिन्न मंडी समितियों में 14 हजार 326 क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है. इस समय शरबती गेहूं की अच्छी कीमत मिल रही है और पुणे में किसानों को 5000 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है. राज्य में मध्य प्रदेश से शरबती गेहूं बिकने के लिए आता है. अन्य राज्यों के मुकाबले महाराष्ट्र की मंडियों में गेहूं का दाम तेज है.
आज प्रदेश में शरबती और स्थानीय किस्में भी बिकने के लिए आ रही हैं. पुणे में शरबती गेहूं की सबसे अधिक आवक हुई है. बाजार में 405 क्विंटल शरबती और 2189 किस्म के 65 क्विंटल गेहूं की आवक हुई है. इस बार किसानों को सामान्य कीमत 5000 रुपये मिली. धाराशिव में स्थानीय गेहूं 5750 रुपये क्विंटल में मिला. सबसे अधिक कीमत इसी बाजार समिति में मिली. महाराष्ट्र गेहूं का बड़ा उत्पादक नहीं है. यहां देश का मुश्किल से 2 प्रतिशत ही गेहूं पैदा होता है. इसलिए मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों की मंडियों में हमेशा गेहूं का दाम अन्य शहरों के मुकाबले ज्यादा रहता है.
वैसे तो पिछले दो-तीन वर्षों से देश के अधिकांश हिस्सों में गेहूं का दाम एमएसपी से ज्यादा चल रहा है. इस साल भी एमएसपी 2275 रुपये है और सरकारी इसी रेट पर गेहूं खरीद रही है. लेकिन लोग ओपन मार्केट में गेहूं बेचना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि उसमें एमएसपी से अधिक दाम मिल रहा है. इसलिए सरकारी खरीद अभी अपने 373 लाख मीट्रिक टन से बहुत कम है.
इस समय देश में गेहूं की सरकारी खरीद चल रही है, फिर भी गेहूं का दाम महाराष्ट्र और गुजरात में बहुत ज्यादा है. दरअसल, उत्तर भारत के राज्यों के मुकाबले महाराष्ट्र में गेहूं का दाम आमतौर पर ज्यादा ही रहता है. ऐसा ट्रेंड लगातार देखा जा रहा है. क्योंकि गेहूं की खेती यहां बहुत कम होती है. देश के कुल गेहूं उत्पादन में महाराष्ट्र का योगदान सिर्फ 2 से 2.5 प्रतिशत ही होता है. यहां के किसान गेहूं की बजाय बागवानी फसलों पर ज्यादा जोर देते हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि इसीलिए महाराष्ट्र में गेहूं महंगा रहता है.
ज्यादा लागत से बढ़ता है दाम
कृषि मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में गेहूं उत्पादन की लागत सबसे ज्यादा आती है. यहां प्रति क्विंटल 2115 रुपये की लागत आती है. इसलिए यहां के किसान सिर्फ अपने खाने के लिए गेहूं की खेती करते हैं. वर्ष 2022-23 में राज्य में 11.31 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था. महाराष्ट्र स्टेट एग्रीकल्चर प्राइस कमीशन के चेयरमैन पाशा पटेल के अनुसार राज्य में पंजाब और हरियाणा के मुकाबले गेहूं की उत्पादन लागत लगभग दोगुनी है, इसलिए किसान गेहूं की खेती बहुत कम करना पसंद करते हैं.





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