मुंबई: लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लोकलुभावन योजनाओं की झड़ी लगा दी है। इनमें ‘लाडली बहन योजना’ सबसे प्रमुख है। सरकार की तरफ से 80 लाख बहनों के खाते में 3000 हजार रुपये ट्रांसफर भी किए जा चुके हैं। बाकी 31 अगस्त तक आवेदन करने वाली पात्र लाडली बहनों की संख्या अभी इस योजना में जुड़नी बाकी है। महायुति को उम्मीद है कि महिला सशक्तीकरण पर केंद्रित यह कदम गेमचेंजर हो सकता है। लाडली बहन योजना राज्य में कितना असर डाल रही है? इसको लेकर राज्य के वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक और सेफोलॉजिस्ट दयानंद नेने ने 16 अगस्त से 25 अगस्त के बीच राज्य में एक व्यापक सर्वे किया है। इसमें उन्होंने पूछा था कि क्या ‘लाडली बहन योजना’ से महायुति को फायदा होगा? तो इस सवाल के जवाब में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं।
‘लाडली बहन’ से कितना लाभ?
सर्वे में शामिल कुल लोगों में 40 फीसदी लोगों ने ऐसा माना कि महायुति को फायदा होगा, लेकिन 37 फीसदी लोगों का जवाब नहीं में आया। 23 फीसदी ने कहा कि उन्हें पता नहीं है। लाडली बहन योजना को महायुति सरकार ने काफी बड़े स्तर पर शोकेस किया है। सरकार ने हाल ही में लाडली बहन योजना के लाभार्थियों को बुलाकर बड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं। महायुति में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने लाडली बहन योजना पर ही अपनी प्री-पोल कैंपेन को फोकस किया हुआ है। दयानंद नेने सर्वे में आए रिजल्ट के बारे में कहते हैं कि महायुति की महत्वाकांक्षी लड़की बहन योजना से महायुति के पक्ष में कोई लहर नहीं बन पाई है। वास्तव में कई लोगों ने टिप्पणी की है कि उन्हें पता है कि यह चुनावी स्टंट है, उनका कहना है कि अगर सरकार मुफ्त में पैसे बांट रही है तो उसे क्यों छोड़ें? नेने ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से लगता है कि इस योजना में बहुत भ्रष्टाचार है। कई संपन्न परिवारों की महिलाओं को रुपये मिले हैं? कैसे? राज्य सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए।





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