नई दिल्ली :1993 मुंबई हत्याकांड के दोषी अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अबू सलेम द्वारा भारत और पुर्तगाल के बीच प्रत्यर्पण समझौते के तहत समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने अबू सलेम को विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) वापस लेने की अनुमति दी, क्योंकि सलेम की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने लंबित मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की अनुमति मांगी थी.
अदालत ने आदेश दिया कि वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने कुछ देर बहस करने के बाद कहा कि इस याचिका को वापस ले लिया गया मानकर खारिज किया जाए, जिससे याचिकाकर्ता को लंबित मामले की शीघ्र सुनवाई और निपटारे के लिए हाई कोर्ट जाने का विकल्प खुला रहे. याचिका को स्वतंत्रता सहित खारिज किया जाता है.
1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में टाडा के तहत दोषी ठहराए गए अबू सलेम ने दावा किया कि भारत और पुर्तगाल के बीच प्रत्यर्पण संधि के अनुसार, 25 वर्ष की कारावास अवधि पूरी होने पर उन्हें रिहा किया जाना चाहिए. उन्होंने 25 वर्ष की सजा की गणना करते समय अच्छे आचरण के लिए अर्जित 3 वर्ष और 16 दिन की कारावास अवधि में छूट का लाभ भी मांगा. अबू सलेम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अधिकारियों को 25 वर्ष की अवधि पूरी होने पर रिहाई की तारीख निर्दिष्ट करने का निर्देश देने की मांग की थी.
हालांकि, न्यायालय ने 7 जुलाई, 2025 को पारित एक आदेश में प्रथम दृष्टया पाया कि 25 वर्ष की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है और अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष, मल्होत्रा ने दलील दी कि उनके मुवक्किल सामान्य और वार्षिक अच्छे आचरण के लिए छूट की मांग कर रहे हैं और आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा अबू सलेम की 25 वर्ष की आयु पूरी न होने की गणना एक गणितीय त्रुटि है.
याचिका में दावा किया था कि अबू सलेम को 10 महीने से अधिक समय से ‘अवैध हिरासत’ में रखा गया है, जबकि वह 1993 के मुंबई विस्फोट मामले में उसे दी गई 25 साल की सजा पहले ही काट चुका है. वर्ष 1993 के मुंबई धमाकों के दोषी सलेम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवंबर, 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था.
भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते की शर्तों के अनुसार, सलेम को मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता और उसके कारावास की अवधि 25 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती. सलेम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी रिहाई की मांग की थी, जिसमें उसने दावा किया था कि अच्छे व्यवहार के लिए दी गई छूट को शामिल करने पर वह पहले ही 25 साल की कैद काट चुका है.





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