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मुंबई मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने एक्ट्रेस और उनकी बहन रंगोली के खिलाफ जांच का दिया आदेश

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अंधेरी : मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट, अंधेरी ने एक धर्म विशेष को लेकर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप पर एक्ट्रेस कंगना रनोट और उनकी बहन रंगोली चंदेल के खिलाफ जांच का आदेश दिया है।
दोनों के खिलाफ एक याचिका दायर कर आरोप लगाया गया था कि इन्होंने सोशल मीडिया में पब्लिसिटी पाने के लिए एक धर्म के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने धारा 202 सीआरपीसी के तहत जांच कर पुलिस से जल्द रिपोर्ट सबमिट करने को कहा है।
कंगना के खिलाफ बांद्रा के रहने वाले मुन्ना वरली और साहिल अशरफ सैयद ने कार्रवाई के लिए अदालत का रुख किया था। याचिका में कहा गया था कि एक्ट्रेस के खिलाफ पुलिस केस दर्ज नहीं कर रही है। अभिनेत्री कंगना रनोट ने बार-बार बॉलीवुड को बदनाम करने की कोशिश की है। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज मीडिया तक, वह बॉलीवुड के खिलाफ बोलती हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि वह हर बार वंशवाद और कट्टरता के बारे में बात करती हैं।
कंगना और उनकी बहन पर आरोप है कि इन्होंने ट्वीट कर लगातार हिंदू और मुस्लिम कलाकारों के बीच फूट डालने का प्रयास किया है। उन्होंने बहुत ही आपत्तिजनक ट्वीट किए हैं, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं। इसलिए इनके खिलाफ जांच का आदेश दे कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
इससे पहले एक धर्म विशेष की भावना आहत करने के आरोप में दोनों के खिलाफ अदालत के आदेश पर 17 अक्टूबर को बांद्रा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। कंगना को पूछताछ के लिए 26 अक्टूबर और उनकी बहन को 27 अक्टूबर को बुलाया गया है। लेकिन भाई की शादी में शामिल होने की बात कह दोनों ने पुलिस से कुछ और वक्त मांगा है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ है केस
बांद्रा के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जयदेव वाय घुले ने कंगना के खिलाफ CRPC की धारा 156 (3) के तहत FIR दर्ज कर जांच के आदेश दिए थे। जिस पर एक्शन लेते हुए पुलिस ने कंगना और उनकी बहन के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में केस दर्ज किया है।
धारा 153 A: आईपीसी की धारा 153 (ए) उन लोगों पर लगाई जाती है, जो धर्म, भाषा, नस्ल वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं। इसके तहत 3 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
धारा 295 A: इसके अंतर्गत वह कृत्य अपराध माने जाते हैं जहां कोई आरोपी व्यक्ति, भारत के नागरिकों के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करता है या ऐसा करने का प्रयत्न करता है।
धारा 124 A: यदि कोई भी व्यक्ति भारत की सरकार के विरोध में सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी गतिविधि को अंजाम देता है जिससे देश के सामने सुरक्षा का संकट पैदा हो सकता है तो उसे उम्र कैद तक की सजा दी जा सकती है। इन गतिविधियों का समर्थन करने या प्रचार-प्रसार करने पर भी किसी को देशद्रोह का आरोपी मान लिया जाएगा।
धारा 34: भारतीय दंड संहिता की धारा-34 के अनुसार, जब एक आपराधिक कृत्य सभी व्यक्तियों ने सामान्य इरादे से किया हो, तो प्रत्येक व्यक्ति ऐसे कार्य के लिए जिम्मेदार होता है जैसे कि अपराध उसके अकेले के द्वारा ही किया गया हो।