मुंबई : अक्टूबर में राज्य सरकार ने सामान्य लोगों को शर्तों के साथ मुंबई लोकल में अनुमति देने की जो मांग की थी, उसके बाद अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। नवंबर के अंतिम सप्ताह में तय हो गया कि फिलहाल सामान्य लोगों की पहुंच से मुंबई लोकल दूर है। दिल्ली और राजस्थान में सर्दी के कारण संक्रमण के मामले बढ़ने से भी सरकार ने फैसले को टाल दिया। चार राज्यों से आने वाले लोगों के लिए शर्तें लगा दीं। इसी बीच मुंबई की लोकल ट्रेनों में अब रोजाना करीब 15 लाख यात्री सफर करने लगे हैं।
मुंबईकरों के बीच चर्चा है कि 15 दिसंबर तक सरकार सामान्य लोगों को अनुमति देने की मांग दोबारा कर सकती है। दरअसल, दशहरा फिर दिवाली में भीड़ जुटने के बावजूद अब संक्रमण के नए मामलों में कोई चिंताजनक वृद्धि नहीं हुई है। दूसरी ओर अन्य राज्यों से आने वाले लोगों की जांच में भी कोई चिंताजनक आंकड़े नहीं आए हैं। ऐसे में लोगों का मानना है कि कोई फैसला जल्द हो सकता है। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार के अनुसार, 28 अक्टूबर के बाद लोगों को ट्रेनों में अनुमति देने को लेकर राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बात नहीं हुई है। ऐसे में 15 दिसंबर से सामान्य लोगों को अनुमति मिलने पर फिलहाल को फैसला नहीं लिया जा रहा है।
मुंबई में रोजाना पश्चिम रेलवे पर रोजाना औसतन 6.5 लाख लोग यात्रा कर रहे हैं। इतने ही यात्री मध्य रेलवे पर यात्रा कर रहे हैं। रेलवे द्वारा प्राप्त ये आंकड़े उन यात्रियों से जुड़े हैं जो आधिकारिक तौर पर टिकट खरीदकर यात्रा कर रहे हैं। अतिआवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों की मानें तो शाम के वक्त ट्रेनों में अब पहले जैसी स्थिति होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। रात 9 बजे के बाद तो टैक्सी या ऑटो वाले, होटल व्यवसाय से जुड़े लोग, सब्ज़ी बेचने वाले लोग सब लोकल में बेटिकट यात्रा करने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार रोजाना दिनभर में करीब दो लाख लोग बेटिकट यात्रा कर रहे हैं। मुंबई लोकल में फिलहाल लोगों की कैटेगरी निर्धारित करके उन्हें अनुमति दी हुई है। सामान्य होने की स्थिति में सबसे पहले कैटेगरी निर्धारित करने पर ही बात बिगड़ सकती है। लाखों लोगों के लिए ये संभव नहीं है।
28 अक्टूबर को राज्य सरकार ने रेलवे को पत्र लिखकर शर्तों के साथ सामान्य लोगों को अनुमति देने की मांग की थी। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार के अनुसार, 28 अक्टूबर के बाद राज्य सरकार द्वारा शिक्षक और बोर्ड की परीक्षाओं में बैठने वाले विद्यार्थियों के लिए अनुमति मांगी गई, लेकिन सामान्य लोगों के लिए अब तक कोई बात नहीं हुई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने जिस तरह से यात्रियों का वर्गीकरण किया था, उसके बाद रेलवे ने वास्तविक स्थिति बताई। ऐसे में हो सकता है सामान्य यात्रियों के लिए दोबारा वर्गीकरण किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि ये भी संभव है कि वकीलों, सिक्योरिटी गार्ड और महिलाओं की तरह और भी वर्ग को धीरे-धीरे अनुमति दी जाए।





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