मुंबई: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने मुंबई (Mumbai) के एक शेयर ब्रोकर को 2.53 करोड़ रुपये की बीमा राशि देने का आदेश दिया है. शेयर ब्रोकर ने यह दावा राशि (Insurance Claim) पाने के लिए 21 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद यह आदेश आया है.
जानकारी के मुताबिक मुंबई (Mumbai) के M/s. RR Chokhani स्टॉक ब्रोकर ने 2000 में यह केस फाइल किया था. शिकायत के मुताबिक M/s. RR Chokhani फर्म ने 15 मार्च 2000 नोटिस किया कि उसके एक कर्मचारी ने फ्रॉड किया है. फर्म की आंतरिक जांच में पता चला कि उसके एक कर्मचारी ने बिना मंजूरी के क्लाइंट से पैसे लेकर शेयर में लगा दिए, जो बाद में डूब गए. जिसके चलते फर्म को भारी नुकसना झेलना पड़ा. इस घटना के 3 दिन बाद उस कर्मचारी ने सुसाइड कर लिया. मरने से पहले उसने एक नोट लिखा, जिसमें उसने स्वीकार किया कि उसने वह फ्रॉड किया था.
इसके बाद शेयर ब्रोकर ने 31 मार्च 2000 को एक करोड़ रुपये के इंश्योरेंस क्लेम (Insurance Claim)के लिएलिखित दावा किया. लेकिन The New India Assurance Company Ltd. ने यह कहकर दावा अस्वीकार कर दिया कि फर्म को वह नुकसान उसके कर्मचारी की धोखेबाजी की वजह से हुआ है और इस प्रकार की हरकत उसके बीमा कवर के बाहर है. बीमा कंपनी से दावा रिजेक्ट होने के बाद शेयर ब्रोकर ने NCDRC में अपनी शिकायत दी.
करीब 21 साल चली सुनवाई के बाद अब NCDRC ने The New India Assurance Company Ltd. का दावा अस्वीकार करने का तर्क खारिज कर दिया है. पिछले हफ्ते दिए अपने आदेश में NCDRC ने कहा कि वादी के तर्कों से साबित हो गया है कि उसके कर्मचारी के बेईमानी से उसे भारी नुकसान झेलना पड़ा और बाद में उस कर्मचारी ने आत्मग्लानि में सुसाइड कर लिया. इससे साबित होता है कि इस वाकये के लिए शेयर ब्रोकर जिम्मेदार नहीं था. ऐसे में बीमा नीति के तहत उसका दावा वाजिब बनता है.





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