मुंबई, अनुशासन की दुहाई देनेवाली भाजपा में इन दिनों भारी असंतोष व्याप्त है। महाराष्ट्र से लेकर कर्नाटक, बंगाल, पंजाब तक यह असंतोष पैâला हुआ है। इसके कारण भाजपाइयों में अंदरूनी ‘जंग’ की तैयारी हो रही है, इसे सुलझाने में भाजपा शीर्ष नेतृत्व के पसीने छूट रहे हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को डर सता रहा है कि इस अंदरूनी ‘जंग’ का प्रतिवूâल प्रभाव पांच राज्यों में होनेवाले आगामी चुनाव पर पड़ सकता है।
भाजपा में विरोध के ताजा स्वर महाराष्ट्र में उठे हैं। महाराष्ट्र में दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी और ओबीसी नेतृत्व का एक दमदार चेहरा मानी जानेवाली पंकजा मुंडे ने इशारों में पार्टी के खिलाफ आवाज उठाई है। माना जा रहा है कि इसी बहाने पंकजा ने भाजपा आलाकमान को अल्टीमेटम दे डाला है। पंकजा मुंडे हाल ही में मोदी वैâबिनेट में अपनी बहन प्रीतम मुंडे को जगह न दिए जाने को लेकर नाराज बताई जा रही हैं। इसी प्रकार बंगाल भाजपा में नेताओं के बीच आपस में ही ठनी हुई है। इसके चलते हाल ही में बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष अपना दुखड़ा रोने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। जानकारी के मुताबिक, दिलीप घोष ने केंद्रीय नेतृत्व से साफ कहा है कि वे बाहरी दलों से आए नेताओं को जल्दी कोई बड़ा पद न दें। माना जा रहा है कि घोष का सीधा निशाना तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आए सुवेंदु अधिकारी पर है, जिन्हें लेकर भाजपा कार्यकर्ता पहले ही काफी बंटे हुए हैं।
इसी तरह केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाए गए भाजपा नेता बाबुल सुप्रियो सोशल मीडिया पर कई बार अपना दर्द बयां कर चुके हैं। इसके अलावा विष्णुपुर से सांसद सौमित्र खान ने सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बंगाल के भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा तो नेतृत्व की दखल के बाद वापस हो गया, लेकिन पार्टी की कलह उजागर हो गई। इतना ही नहीं, भाजपा इस वक्त पंजाब में भी परेशानी का सामना कर रही है। नए कृषि कानूनों को लेकर नेताओं में खटपट बढ़ती जा रही है। कई नेताओं ने खुद को पार्टी लाइन से दूर रखते हुए कृषि कानून के खिलाफ बोलना भी शुरू कर दिया है, वहीं कुछ और नेता दूसरी पार्टियों में अपनी संभावनाएं देख रहे हैं।
पूर्व वैâबिनेट मंत्री अनिल जोशी को तो कृषि कानून के खिलाफ बयान देने के लिए पार्टी ने छह साल के लिए सस्पेंड तक कर दिया था। उधर कर्नाटक में भी भाजपा अंदरूनी तौर पर विरोध का सामना कर रही है। कर्नाटक में तो मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को मंत्रियों और विधायक-सांसदों ने ही निशाना बना लिया है। हाल ही में एक भाजपा विधायक ने येदियुरप्पा सरकार पर अपना फोन टैप कराने का आरोप लगाया था, जबकि इससे पहले सरकार में मंत्री सीपी योगेश्वर और रमेश जरकीहोली अलग-अलग मुद्दों को लेकर सीधे तौर पर अपनी सरकार के खिलाफ बयान दे चुके हैं।





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