मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को मुंबई उच्च न्यायालय में कहा कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह यह कहकर अपने ऊपर लगे आरोपों की जांच से नहीं बच सकते कि उनके विरुद्ध बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है। राज्य सरकार के वकील ने यह बात परमबीर सिंह द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई के दौरान कही, जिसमें सिंह ने हाल ही में अपने विरुद्ध दर्ज दो आपराधिक मामलो को चुनौती दी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने इस बात पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है कि परमबीर सिंह की याचिका सुनवाई की जानी है या नहीं। न्यायमूर्ति एसएस शिंदे व एनजे जमादार की खंडपीठ ने परमबीर की याचिका पर सुनवाई करते हुए जब उनके विरुद्ध शुरू की गई दो प्राथमिक जांचों के बारे में जानना चाहा तो सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक जयेश याग्निक ने बताया कि दोनों जांचें अभी भी चालू हैं।
इस दौरान राज्य सरकार की ओर से ही पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डेरियस खंबाटा ने उच्च न्यायालय द्वारा सिंह की याचिका सुने जाने पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि यह मामला एक अधिकारी सेवा से संबंधित है। इसकी सुनवाई सिर्फ प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में ही हो सकती है। खंबाटा ने परमबीर सिंह के इस तर्क को भी बोगस करार दिया कि उनके खिलाफ बदले की भावना के तहत कार्रवाई की जा रही है। खंबाटा ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आपने अनिल देशमुख के विरुद्ध कुछ आरोप लगा दिए हैं, आप अपने विरुद्ध लगे आरोपों से बच नहीं सकते। आपके विरुद्ध इंस्पेक्टर अनूप डांगे ने दो फरवरी, 2021 को शिकायत दर्ज कराई थी। जबकि उस समय तक इस प्रकरण की शुरुआत भी नहीं हुई थी।





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