विरार, वसई-विरार की जनसंख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन मनपा के पास अपना एक भी पोस्टमार्टम (शव परीक्षण) केंद्र नहीं है। मनपा को शवों के पोस्टमार्टम के लिए जिला परिषद केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है। पोस्टमार्टम कराने के लिए शवों को घंटों इंतजार करना पड़ता है क्योंकि जिला परिषद के पोस्टमार्टम केंद्र की क्षमता कम है। इस लेट-लतीफी से शवों की दुर्दशा हो जाती है। बताया जाता है कि जबसे वसई-विरार मनपा की स्थापना हुई है, तबसे शव परीक्षण करनेवाले केंद्र पर विचार ही नहीं किया। शहर के जिला परिषद पोस्टमार्टम केंद्र में प्रतिदिन औसतन ४ से ५ शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। सबसे ज्यादा पोस्टमार्टम करवानेवालों कि संख्या मनपा क्षेत्र में है। इससे जिला परिषद के पोस्टमार्टम केंद्र पर खासा दबाव है। जिला परिषद के पोस्टमार्टम केंद्र में मानव संसाधन की कमी के कारण पोस्टमार्टम में काफी समय लग जाता है। अप-टू-डेट सिस्टम (यंत्र) नहीं होने के कारण शवों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट कराने के लिए मुंबई भेजना पड़ता है, जिससे पुलिस को काफी परेशानी होती है।
वसई-विरार मनपा अंतर्गत जिला परिषद के ५ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। ये हैं अगाशी, कामन, नवघर, नालासोपारा और विरार स्थित ग्रामीण अस्पताल। अगाशी स्वास्थ्य केंद्र में ३, कामन में ३, नवघर में २ और विरार केंद्र में २ डॉक्टर हैं। ये डॉक्टर पूरे स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी हैं। प्राथमिक केंद्र में कम स्टॉफ होने के कारण पोस्टमार्टम में देरी होती है क्योंकि इस प्रक्रिया में समय लगता है। इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। कई मामलों में मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती है लेकिन समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण उन्हें अपराध की जांच में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वसई-विरार मनपा ने पिछले १२ वर्षों में केवल २ अस्पताल स्थापित किया है। मनपा द्वारा निर्मित अस्पताल में पोस्टमार्टम केंद्र करने की प्रकिया को लागू करना आसान है, लेकिन मनपा ने कभी पोस्टमार्टम केंद्र पर ध्यान ही नहीं दिया। इस संबंध में अपर आयुक्त संतोष देहरकर ने जानकारी देते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले पर कभी विचार ही नहीं किया।
जिला परिषद के शव परीक्षण केंद्र में पोस्टमार्टम करनेवाला कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है। जिला परिषद के वसई तालुका के ८ स्वास्थ्य केंद्रों में से ५ स्वास्थ्य केंद्रों में पोस्टमार्टम केंद्र हैं। इस केंद्र में कभी भी सरकारी स्तर पर नियुक्ति नहीं हुई है। निजी सफाईकर्मी पोस्टमार्टम करता है। उन्हें कोई सरकारी मानदेय नहीं दिया जाता है। मृतक के परिजनों से पैसे लेकर उन्हें दिए जाते हैं।





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