मुंबई, कहते हैं कि जीवन में शादी-ब्याह के लिए एक अगुवा की जरूरत होती है। लेकिन मुंबई से सटे रायगढ़ जिला अंतर्गत न्यू पनवेल क्षेत्र में २८ जुलाई को मिले एक अधजले शव मामले में पुलिस ने सभी तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हत्यारों में शामिल मुख्य साजिशकर्ता ने शादी कराने का झांसा देकर लिए गए पैसे वापस लौटाने से बचने के लिए उक्त वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद उक्त अत्याचारी अगुवा की हैवानियत की पोल खुल गई।
२८ जुलाई २०२२ को न्यू पनवेल के जंगल में एक शव मिला था। इस संबंध में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था। उसके बाद शव की पहचान किए जाने पर पता चला कि यह शव न्यू पनवेल स्थित उसरवाली गांव में रहने वाले प्रवीण शांताराम का है। इस मामले में पुलिस ने जांच करते हुए ३ अगस्त को नरेश को मुंबई से गिरफ्तार किया था, जबकि पुलिसिया जांच में नरेश के साथ-साथ अमन सिंह व दिलीप शुक्ला का भी नाम सामने आया। फरार दोनों आरोपितों के आजमगढ़ में छिपे होने की सूचना न्यू पनवेल पुलिस को मिली। नई मुंबई पुलिस के आयुक्त, डीसीपी और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के मार्गदर्शन में टीम उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ पहुंची। एसटीएफ वाराणसी यूनिट की मदद से अमन सिंह एवं दिलीप शुक्ला को आजमगढ़ के खेमीपुर से उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।
जांच में सामने आया कि मृतक प्रवीण शांताराम की शादी नहीं हुई थी। उसके परिचित नरेश ने शादी कराने का झांसा देकर शांताराम से ४० हजार रुपए लिए थे लेकिन शादी नहीं कराई। कई दिनों तक नरेश शांताराम को बरगलाता रहा लेकिन बाद में शांताराम समझ गया कि नरेश उसे चूना लगा रहा है। अत: शांताराम उससे अपने ४० हजार रुपए वापस मांगने लगा। पैसे लौटाने से बचने के लिए नरेश ने शांताराम को मारने की योजना बनाई। इस कार्य के लिए उसने अमन सिंह व दिलीप शुक्ला से संपर्क किया। तीनों ने मिलकर प्रवीण शांताराम को २५ जुलाई को पैसा लौटाने के बहाने बुलाया और न्यू पनवेल के जंगल में ले जाकर मौत के घाट उतार दिया।





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