मुंबई: महाराष्ट्र राज्य में बाहरी वाहनों की आवाजाही काफी रहती है. प्रदेश के अंदर कुछ समय से फेक नंबर और गलत नंबर प्लेट के वाहनों की संख्या बढ़ रही है. इसलिए महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने अपने संज्ञान में इन वाहनों को लाने की बात कही है. प्रदेश के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने बाहर से ट्रांसफर हुए वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन पर लगाम लगाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेस यानी SOP जारी करने के लिए कहा है. डिपार्टमेंट का ये फरमान बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर लागू होगा.
ईटी ऑटो की खबर के मुताबिक, महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने रविवार, 3 मार्च को स्टैंटडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेस को शुरू करने की घोषणा की. ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने ये फरमान तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और बाकी राज्यों से आने वाले ट्रक और बस की आवाजाही और उनके महाराष्ट्र में बढ़ते फेक रजिस्ट्रेशन को देखते हुए लिया है. बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर में गड़बड़ी को देखते हुए ये फैसला लिया गया है.
महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के इस फैसले के तहत जानकारी दी गई है कि बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को प्रदेश में स्थित क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTOs) जाकर अपने इंजन नंबर को दोबारा रजिस्टर कराना होगा.
महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट कमिश्नर विवेक भीमनवार ने पीटीआई से बात करते हुए बताया कि शुरुआत में दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों को लेकर कोई रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया नहीं थी और RTO के क्लर्क इन वाहनों की एंट्री वाहन पोर्टल पर करते थे और सीनियर क्लर्क उसे मंजूरी दे दिया करते थे.
अब नए निर्देशों के मुताबिक, हर RTO को दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों के लिए अपने ऑफिस में अलग से रजिस्टर में जानकारी इकट्ठा करनी होगी. साथ ही क्षेत्रीय डिप्टी ट्रांसपोर्ट ऑफिसर को सभी वाहनों की एंट्री की सही जांच करने के बाद ही मंजूरी देनी चाहिए और अगर वाहन पोर्टल पर जानकारी न हो, तो वहां भी जानकारी देनी चाहिए. अगर वाहन पोर्टल पर इनकी जानकारी मौजूद ना हो तो डिप्टी आरटीओ ऑफिस से पूर्व मंजूरी लेनी होगी. इसके बाद ही वाहन की एंट्री और डिजिटल रिकॉर्ड्स को आरटीओ के अधिकार क्षेत्र में रजिस्टर करना मुमकिन होगा.
ऑफिशियल जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में 50 से ज्यादा आरटीओ हैं. प्रदेश के कई ऑफिस में एक ही वाहन को कई बार रजिस्टर किया जा चुका है. लेकिन, पिछले सालों में सटीक नंबरों की जानकारी उपलब्ध नहीं है.





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