मुंबई: त्योहारों और बड़े धार्मिक-सामाजिक आयोजनों में श्रद्धालुओं तथा आम लोगों को परोसे जाने वाले भोजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने नया नियम लागू किया है। अब त्योहार या सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बड़े पैमाने पर खाना, प्रसाद अथवा अन्य खाद्य सामग्री परोसने वाले आयोजकों को इसकी जानकारी कम से कम सात दिन पहले संबंधित विभाग को देनी होगी। इसका उद्देश्य सामूहिक भोज के दौरान दूषित भोजन और फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं को रोकना है।
नए नियम के तहत आयोजकों को भोजन तैयार करने और वितरण से जुड़ी जरूरी जानकारी एफडीए को उपलब्ध करानी होगी। इसमें कार्यक्रम की तारीख, स्थान, भोजन तैयार करने वाली जगह, परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थ और भोजन उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति या कैटरर से संबंधित विवरण मांगा जा सकता है। सूचना मिलने के बाद जरूरत के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैयारियों और साफ-सफाई की जांच कर सकेंगे।
त्योहारों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए फैसला
गणेशोत्सव, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा, दिवाली और अन्य धार्मिक-सामाजिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन और प्रसाद तैयार किया जाता है। कई जगह सामूहिक भंडारे भी आयोजित होते हैं। ऐसे आयोजनों में थोड़ी सी लापरवाही बड़ी संख्या में लोगों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए एफडीए ने आयोजकों को पहले से सूचना देने की व्यवस्था लागू की है। विभाग का जोर इस बात पर है कि भोजन तैयार करने से लेकर उसे लोगों तक पहुंचाने तक स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए।
जांच कर सकते हैं खाद्य सुरक्षा अधिकारी
पूर्व सूचना मिलने से एफडीए के अधिकारियों को बड़े आयोजनों की निगरानी करने में आसानी होगी। जरूरत पड़ने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर सकते हैं और भोजन के नमूने लेकर जांच के लिए भेज सकते हैं। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है। नए नियम का मकसद आयोजनों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है। आयोजकों से कहा गया है कि वे अंतिम समय तक इंतजार करने के बजाय कार्यक्रम की योजना बनाते समय ही खाद्य सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें। त्योहारी सीजन में लाखों लोग सार्वजनिक आयोजनों, पंडालों और धार्मिक कार्यक्रमों में प्रसाद तथा भोजन ग्रहण करते हैं। ऐसे में सात दिन पहले सूचना देने की व्यवस्था से प्रशासन को निगरानी का पर्याप्त समय मिलेगा और फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।





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