मुंबई, कहते हैं विवादों से हमेशा बचना चाहिए। खासकर बदले की भावना से कुछ करने से पहले अच्छी तरह सोच-समझ लेना चाहिए। अन्यथा अंजाम बर्बादी ही होता है। इसका उदाहरण हाल ही में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में देखने को मिला, जहां ६ साल पहले छेड़छाड़ के विवाद में एक शिक्षक की हत्या कर दी गई थी। अब उस शिक्षक के परिजनों ने हत्यारोपियों में शामिल चाचा-भतीजे को मौत के घाट उतार दिया है। पुलिस की ४ टीमें अब चाचा-भतीजे के हत्यारों की तलाश में जुटी हैं, जबकि वे गिरफ्तारी के डर से भागे फिर रहे हैं। हालांकि, उन्हें भी पता है कि जेल की सलाखें ही अब उनका मुक़द्दर बनेंगी।
१५ अगस्त, २०१५ को बिजनौर से सटे धौकलपुर इलाके में प्राथमिक स्कूल के शिक्षक अमन सिंह की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था। तब अंकुर ने अमन को ध्वजारोहण के समय गोली मार दी थी। उस मामले में एक अन्य शिक्षक धीर सिंह, उसके भाई जगवीर एवं भतीजे अंकुर को नामजद किया गया था। इससे अमन सिंह के परिजनों के मन में बदले की आग लगातार धधकती रही। दो साल पहले अमन के हत्यारोपी धीर सिंह और अंकुर को अदालत से जमानत मिल गई। इससे मृतक अमन सिंह के परिजनों के मन में धधक रही बदले की आग ज्वालामुखी की तरह फट पड़ी। अमन सिंह का बेटा अनुज पिता की हत्या का बदला लेने के लिए अपने दोस्तों के साथ धीर सिंह और अंकुर की गतिविधियों पर नजर रखकर मौके का इंतजार करने लगा। बीते रविवार को उन्हें मौका मिल गया।
धीर सिंह, भतीजे अंकुर और अपने पिता महाराज के साथ बीते रविवार को सुबह ट्रैक्टर-ट्रॉली से भूसा लेने जंगल गया था। भूसा लेकर वापस लौटते समय गांव से करीब एक किलोमीटर पहले कार से आए हमलावरों ने फिल्मी स्टाइल में धीर सिंह के ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता रोक लिया। धीर सिंह और अंकुर जब तक कुछ समझ पाते, तब तक हमलावर उन पर गोलियां बरसाने लगे। गोली लगने से घायल अंकुर वहीं ट्रैक्टर के पास गिर गया। इस बीच धीर सिंह ने भागकर बचने की कोशिश की थी लेकिन हमलावरों ने उन्हें दौड़ाकर खेत में घेर लिया और गोलियों से छलनी कर डाला। हालांकि, हमलावरों ने जगवीर पर हमला नहीं किया। फिलहाल बिजनौर शहर के कोतवाली थाना पुलिस की चार टीमें हमलावरों की तलाश में जुटी हैं। पुलिस ने उनके ऊपर २५-२५ हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर दिया है।
बीते रविवार को हुई घटना बिजनौर में बदले की भावना से हुई हत्या की कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी वहां ऐसी कई रोंगटे खड़े कर देनेवाली घटनाएं घट चुकी हैं। इससे पहले वर्ष २०१९ के दिसंबर महीने में बिजनौर जिला स्थित सीजेएम कोर्ट में पेशी पर आए हत्या के दो अभियुक्तों पर कुछ लोगों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसार्इं थी, जिनमें एक की मौत हो गई, जबकि दूसरा अभियुक्त अफरातफरी का लाभ उठाकर भागने में सफल रहा था। यह पूरी वारदात उस वक्त हुई, जब सीजेएम कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही थी। उस फायरिंग में सीजेएम योगेश कुमार बाल-बाल बच गए थे। हालांकि, इस दौरान दो पुलिसकर्मियों को भी गोली लगी। इस वारदात को उसी साल जून महीने में हुए दोहरे हत्याकांड का बदला लेने के मकसद से अंजाम दिया गया था। हुआ ऐसा था कि वर्ष २०१९ के जून में नजीबाबाद में बसपा नेता एहसान और उनके भांजे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसमें नजीबाबाद के ही शाहनवाज और जब्बार के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। दिसंबर में कोर्ट परिसर में गोलीबारी की घटना से कुछ ही दिन पहले शाहनवाज और जब्बार ने दिल्ली में सरेंडर किया था, जिन्हें १७ दिसंबर को सीजेएम कोर्ट में पेशी के लिए दिल्ली पुलिस बिजनौर लेकर आई थी। इसी बीच एहसान का बेटा साहिल अपने दो साथियों के साथ कोर्ट परिसर में पहुंचा और अभियुक्तों को निशाना बनाते हुए फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में शाहनवाज को कई गोलियां लगीं और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दौरान, पेशी पर आया दूसरा अभियुक्त जब्बार वहां से भाग निकलने में सफल रहा। बताया जाता है कि उस वारदात के बाद कोर्ट में मौजूद वकीलों ने हमलावरों को दौड़ाकर पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया था।





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