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कुत्ते के काटने के बाद 32 लोग पहुंचे अस्पताल, दो बच्चे भर्ती; चार महीने में 3292 मामले

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भिवंडी: महाराष्ट्र के भिवंडी में कुत्तों के काटने की घटनाओं ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। रविवार को कामतघर इलाके से करीब 32 लोगों को इलाज के लिए आईजीएम सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल लाया गया। इनमें दो बच्चे भी शामिल थे, जिन्हें चोट की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती किया गया। स्थानीय स्तर पर एक ही जानवर द्वारा 32 लोगों पर हमला किए जाने की खबरें सामने आईं, हालांकि इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
आईजीएम सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की डॉ. माधवी पेढारे के अनुसार, दोनों बच्चों को कुत्ते के काटने की ‘कैटेगरी 3’ श्रेणी की चोट थी। इसी कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। अन्य लोगों को भी उनकी स्थिति के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सहायता दी गई। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के अस्पताल पहुंचने के बाद कामतघर इलाके में कुत्तों के काटने की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ गई। स्थानीय खबरों में दावा किया गया कि एक ही जानवर ने करीब 32 लोगों को निशाना बनाया, लेकिन अस्पताल से उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस दावे की विशेष रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि सभी लोगों को एक ही कुत्ते ने काटा या अलग-अलग घटनाओं के बाद वे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे थे।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक दो बच्चों को भर्ती करने की जरूरत पड़ी। कुत्ते के काटने के मामलों में घाव की प्रकृति और संपर्क के आधार पर उपचार निर्धारित किया जाता है। गंभीर श्रेणी की चोट में समय पर चिकित्सकीय उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए बच्चों को अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। रविवार की घटना कोई अकेला मामला नहीं है। भिवंडी में पिछले कुछ महीनों से कुत्तों के काटने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। नगर निकाय के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जुलाई के बीच शहर में कुत्तों के काटने के कुल 3,292 मामले दर्ज किए गए। इन चार महीनों में सबसे ज्यादा मामले अप्रैल में सामने आए थे।
इन आंकड़ों ने शहर में आवारा कुत्तों और लोगों की सुरक्षा से जुड़ी चिंता को बढ़ा दिया है। औसत निकाला जाए तो अप्रैल से जुलाई के बीच हर महीने 800 से अधिक कुत्ते के काटने के मामले दर्ज हुए। इतनी बड़ी संख्या स्थानीय प्रशासन के लिए भी चुनौती पेश करती है। कामतघर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में सड़कों और गलियों में लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। बच्चे भी घरों से बाहर खेलते हैं। ऐसे में आक्रामक कुत्तों की मौजूदगी लोगों, विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा पैदा कर सकती है। रविवार को दो बच्चों को अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद अभिभावकों की चिंता भी बढ़ना स्वाभाविक है।